विवेक को अपनी जिंदगी में कुछ खास नहीं लग रहा था। वह एक छोटी सी कंपनी में काम करता था, महीने की तनख्वाह से गुजर-बसर करता था। हर दिन एक जैसा—सुबह उठना, ऑफिस जाना, काम करना, घर लौटना, सो जाना। उसे लगता था—बस यही जिंदगी है।
एक दिन उसके ऑफिस में एक वर्कशॉप हुई। ट्रेनर ने एक गतिविधि करवाई— “अपने 10 साल बाद के खुद को एक ख़त लिखो।” विवेक ने कागज़ उठाया। पहले तो उसे कुछ समझ नहीं आया। फिर उसने लिखना शुरू किया।
विवेक का ख़त
प्रिय विवेक,
आज मैं तुम्हें 10 साल बाद से लिख रहा हूँ। मैं तुम्हें देख रहा हूँ—तुम एक सफल उद्यमी हो, अपनी कंपनी चला रहे हो। तुम्हारी एक प्यारी सी फैमिली है। तुम वह बन गए हो जो तुम हमेशा बनना चाहते थे।
लेकिन एक बात कहना चाहता हूँ—जो डर आज तुम्हें रोक रहा है, वह जायज़ नहीं है। तुम कर सकते हो। बस कदम बढ़ाओ। तुम्हारा भविष्य का दोस्त।
विवेक ने वह ख़त लिफाफे में डाला और अपनी डायरी में रख दिया। लेकिन यह क्या? उसके अंदर कुछ बदल गया। उसने महसूस किया—जब उसने 10 साल बाद के खुद को देखा, तो लगा कि वह सपना सच में मुमकिन है।
आज विवेक एक प्रेरक वक्ता है। वह हर युवा को अपने भविष्य को ख़त लिखने की सलाह देता है। वह कहता है— “भविष्य को ख़त लिखना सिर्फ एक गतिविधि नहीं है। यह अपने सपनों को एक दिशा देना है। जब तुम लिखते हो, तो तुम अपने दिमाग को एक नक्शा देते हो। और दिमाग हमेशा उसी रास्ते पर चलता है।”
तो आज ही अपने भविष्य को एक ख़त लिखिए। कागज़ निकालिए, कलम उठाइए, और लिखिए—जैसे आप 10 साल बाद खुद को लिख रहे हों। बताइए आप क्या बनना चाहते हैं, कहाँ पहुँचना चाहते हैं, क्या पाना चाहते हैं। फिर उसे एक लिफाफे में बंद कर दीजिए और एक सुरक्षित जगह रख दीजिए।
और जब 10 साल बाद आप वह ख़त खोलेंगे, तो पाएंगे—आपने जो सपना देखा था, वह सच हो चुका है। क्योंकि भविष्य उन्हीं का होता है, जो उसे पहले लिखते हैं।