कबीर जीवन के एक ऐसे चौराहे पर खड़ा था जहाँ से चार रास्ते निकलते थे। हर रास्ता उसे एक अलग मंज़िल का वादा कर रहा था। उसके सामने दो बड़े विकल्प थे—एक तरफ एक अच्छी नौकरी का पैकेज था, स्थिरता, महीने की तनख्वाह और सुरक्षा। दूसरी तरफ अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने का सपना था—जोखिम भरा, अनिश्चित, लेकिन उसके दिल के करीब।
कबीर के मन में तरह-तरह के सवाल थे। ‘अगर बिज़नेस फेल हो गया तो?’ ‘अगर नौकरी करके मैं अपने सपने को मार दूं तो?’ ‘लोग क्या कहेंगे?’ ‘परिवार पर बोझ तो नहीं बनूंगा?’ वह अपने गुरु के पास गया, जो उसके लिए हमेशा रास्ता दिखाने वाले रहे थे।
नौकरी का रास्ता
- स्थिर आय
- सुरक्षा
- बीमा और भत्ते
- कम जोखिम
- सीमित आज़ादी
- 9-9 की दिनचर्या
बिज़नेस का रास्ता
- असीमित संभावनाएँ
- अपने बॉस खुद
- सपनों को जीने का मौका
- अधिक जोखिम
- आय अनिश्चित
- शुरुआत में मुश्किल
गुरु ने कबीर को एक कहानी सुनाई। “एक बार एक चौराहे पर एक बूढ़ा आदमी बैठा था। एक युवक आया और बोला—‘बाबा, मुझे सही रास्ता बताओ।’ बूढ़े ने कहा—‘बेटा, सही रास्ता वही है जो तुम्हें तुम्हारे सपने के करीब ले जाए। दूसरों के सपनों पर मत चलो, अपने सपने पर चलो।’”
कबीर ने गहरी साँस ली। उसने तय किया—वह बिज़नेस शुरू करेगा। अपने सपने पर चलेगा, भले ही रास्ता कठिन हो। उसने अपना छोटा-सा ऑनलाइन स्टोर शुरू किया। शुरुआत बहुत मुश्किल थी। पहले साल में उसे नुकसान हुआ। दूसरे साल में टूट-फूट रही। लेकिन उसने हार नहीं मानी। तीसरे साल में उसका बिज़नेस चल निकला। पाँचवें साल में वह इतना सफल हो गया कि उसने दूसरों को भी मौका देना शुरू कर दिया।
आज कबीर उन युवाओं को मेंटर करता है जो अपने जीवन के चौराहे पर खड़े होते हैं। वह उनसे कहता है— “चौराहे से मत डरो। यह तुम्हें तुम्हारी मंज़िल से मिलाने का इंतज़ार कर रहा है। बस अपने दिल की सुनो, और उस रास्ते पर चलो जो तुम्हें सच में खुश करता है।”
कबीर आज उन लोगों में से नहीं है जो चौराहे पर खड़े होकर डरते हैं। वह जानता है कि हर चौराहा एक नई शुरुआत है। हर मोड़ एक नया अवसर है। और सबसे अच्छी बात—चौराहे पर तुम्हारे अलावा कोई तुम्हारे लिए रास्ता नहीं चुन सकता।
चौराहे से भागो मत। उसे गले लगाओ। वह तुम्हारा सबसे बड़ा शिक्षक है।