नील एक जीनियस AI रिसर्चर था। उसने "कर्माAI" नामक एक क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम किया—एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम जो नैतिक निर्णय ले सकता था। उसका लक्ष्य था: एक ऐसा AI बनाना जो केवल स्मार्ट न हो, बल्कि जिम्मेदार भी हो।
प्रोजेक्ट के शुरुआती चरणों में, नील ने AI के लिए एक बेसिक नैतिकता कोड लिखा:
class KarmaAI_Ethics:
def __init__(self):
self.prime_directives = [
"सर्वप्रथम, कोई नुकसान न करो",
"मानवता की सेवा करो",
"निष्पक्ष और पारदर्शी रहो"
]
def make_decision(self, input_data):
# हर निर्णय कर्म बन जाता है
decision = self.analyze_impact(input_data)
return decision
लेकिन कंपनी के प्रबंधन को नील का दृष्टिकोण बहुत आदर्शवादी लगा। उन्हें तेज़ रिजल्ट्स चाहिए थे, न कि नैतिकता के लेक्चर। प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा, "नील, यह बिज़नेस है, फिलॉसफी क्लास नहीं। AI को प्रॉफिट जनरेट करना चाहिए।"
दबाव में आकर, नील ने कुछ "ऑप्टिमाइज़ेशन" किए। उसने AI के निर्णय-प्रक्रिया में प्रॉफिट मार्जिन को प्राथमिकता दी। अब AI लोन एप्लिकेशन्स को रिजेक्ट करने लगा जहाँ जोखिम अधिक था (भले ही वे गरीब परिवारों के हों), और समृद्ध ग्राहकों को प्राथमिकता देने लगा।
एक दिन, कर्माAI ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। एक छोटी सी दवा कंपनी, जो सस्ती दवाएँ बनाती थी, को AI ने "अवांछनीय इन्वेस्टमेंट" घोषित कर दिया, क्योंकि उसका प्रॉफिट मार्जिन कम था। इस निर्णय के कारण, वह कंपनी बंद हो गई, और हजारों गरीब मरीज़ों को महँगी दवाएँ खरीदनी पड़ीं।
जब नील को इसकी जानकारी मिली, तो उसका दिल टूट गया। उसने महसूस किया कि उसने जो कोड लिखा था, वह अब वास्तविक दुनिया में कर्म बन रहा था। उसकी "ऑप्टिमाइज़ेशन" लाइन्स अब पीड़ा में बदल रही थीं।
नील ने फैसला किया कि वह इससे बड़ी गलती नहीं करेगा। उसने रात भर जागकर कर्माAI का कोड फिर से लिखा। इस बार, उसने एक नया मॉड्यूल जोड़ा:
def karma_impact_analysis(decision):
# 7 स्तरों पर प्रभाव विश्लेषण
impact_levels = {
"व्यक्तिगत": calculate_personal_impact(decision),
"सामाजिक": calculate_social_impact(decision),
"पर्यावरणीय": calculate_environmental_impact(decision),
"दीर्घकालिक": calculate_long_term_impact(decision),
"नैतिक": calculate_ethical_score(decision)
}
return weighted_karma_score(impact_levels)
अगले दिन, नील ने अपने बॉस के सामने इस्तीफा रख दिया। "मैं ऐसा AI नहीं बना सकता जो लोगों को नुकसान पहुँचाए," उसने कहा। उसने अपना अपडेटेड कोड ओपन-सोर्स कर दिया, ताकि कोई भी डेवलपर उसका उपयोग कर सके।
कुछ महीनों बाद, नील ने "एथिकल-Tech फाउंडेशन" शुरू किया—एक ऐसा संगठन जो युवा डेवलपर्स को जिम्मेदार कोडिंग सिखाता था। उनका मुख्य सिद्धांत था: "हर लाइन कोड एक कर्म है। जो तुम लिखते हो, वह दुनिया को आकार देता है।"
आज, नील के पूर्व कंपनी का AI सिस्टम अभी भी चल रहा है, लेकिन नील का ओपन-सोर्स कोड दुनिया भर के 50,000+ डेवलपर्स उपयोग कर रहे हैं। उनमें से एक ने लिखा: "नील सर, आपके 'कोड ऑफ़ कर्मा' ने मुझे याद दिलाया कि मैं सिर्फ़ कोड नहीं लिख रहा—मैं भविष्य बना रहा हूँ।"
नील अब समझता है कि सबसे महत्वपूर्ण एल्गोरिदम कंप्यूटर में नहीं, बल्कि मानव हृदय में चलता है। और वह एल्गोरिदम सरल है: जो बोओगे, वही काटोगे—चाहे वह कोड की लाइनें हों या जीवन के चुनाव।